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बच्चों को स्कूल में मिड-डे मील के अलावा ब्रेकफास्ट देने की तैयारी, वजह- हेल्दी फूड से बच्चों के मानसिक विकास में मदद मिलेगी

1 week ago 3

नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत शिक्षा के स्तर को सुधारने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें अब बच्चों को मिड-डे मील के अलावा ब्रेकफास्ट देने की सिफारिश की गई है। पिछले हफ्ते ही कैबिनेट से पास नई शिक्षा नीति में इस बात जोर दिया गया था कि बच्चों को सुबह हेल्दी ब्रेकफास्ट देने से उनका मानसिक विकास तेजी से होगा। सभी सरकारी या उससे जुड़े स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना चलाई जाती है।

बच्चों की हेल्थ और न्यूट्रीशन का खास ख्याल रखा गया
नई नीति में कहा गया कि अगर बच्चों को सही डाइट न मिले या वह बीमार हों तो उनकी पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे में बच्चों की हेल्थ और न्यूट्रीशन का खास ख्याल रखा जाएगा। इस सभी पहलुओं को देखते हुए ट्रेंड सोशल वर्कर, काउंसलर और कम्यूनिटी को स्कूलिंग सिस्टम से जोड़ने की भी तैयारी की जा रही है।

इसके अलावा रिसर्च बताती हैं कि हेल्दी ब्रेकफास्ट से बच्चों को ऐसे सब्जेक्ट में मदद मिलती है, जिसमें ज्यादा समय और दिमाग की जरूरत होती है। लिहाजा एनईपी में मीड-डे मील के साथ हेल्दी ब्रेकफास्ट को जोड़ने की सिफारिश की गई है।

मॉनिटरिंग के लिए हेल्थ कार्ड जारी होंगे
नीति के मुताबिक, ऐसी जगह जहां बच्चों तक गर्म खाना पहुंचाना संभव नहीं होगा, वहां हेल्दी मील जैसे- मूंगफली, चना-गुड़ और स्थानीय फलों का इस्तेमाल किया जाएगा। सभी स्कूलों के बच्चों को रेग्युलर हेल्थ चेकअप से गुजरना होगा। स्कूलों में 100 फीसदी टीकाकरण की सुविधा भी होगी। इसकी मॉनिटरिंग के लिए हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे।

5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नई शिक्षा नीति के अहम बिंदु

नई नीति में प्रस्ताव है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रारंभिक कक्षा या बालवाटिका ले जाया जाएगा।प्रारंभिक कक्षा में प्ले बेस्ड लर्निंग पर फोकस होगा। इसमें बच्चों में कॉग्निटिव, इफेक्टिव और साइकोमोटर एबिलिटीस डेवलप करने फोकस किया जाएगा।आंगनबाड़ी सिस्टम में उपलब्ध हेल्थ चेक-अप और ग्रोथ मॉनिटिरिंग को प्रारंभिक कक्षा के बच्चों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।आंगनबाड़ी और प्राथमिक स्कूल दोनों के बच्चों को शामिल किया जाएगा।

क्या है मिड-डे मील?
एचआरडी मिनिस्ट्री के सीनियर अफसर ने बताया कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट 2013 के तहत सभी सरकारी और इससे जुड़े हुए स्कूलों में रोज पहली से आठवीं या 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों को मुफ्त में मिड-डे मील दिया जाता है। इस योजना के तहत करीब 11.59 करोड़ बच्चों को फायदा मिलता है। इसमें करीब 26 लाख कुक-कम-हेल्पर्स इसके लिए जोड़े गए हैं।

पिछले हफ्ते नई शिक्षा नीति पर हुआ फैसला
29 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी गई थी। 34 साल बाद एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव किए गए। सरकार ने 2035 तक हायर एजुकेशन में 50% एनरोलमेंट का लक्ष्य तय किया। नई शिक्षा नीति के तहत दुनियाभर की बड़ी यूनिवर्सिटी देश में अपना कैंपस बना सकेंगी।



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