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कोरोना संकट के बावजूद लोगों की कार खरीदने की इच्छा में कोई कमी नहीं, मौका भुनाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही ऑटो कंपनियां

1 month ago 10

महामारी के कारण लंबे समय तक लॉकडाउन लगने से कई सेक्टर में मंदी छाई रही, बावजूद इसके भारत में नई कार खरीदने वाले ग्राहकों में कोई कमी नहीं आई हैं। अनिश्चित और लगातार बदलते परिवेश में ऑटो सेक्टर में डिजिटलीकरण तेज हो गया है क्योंकि ऑटो इंडस्ट्री ग्राहकों से जुड़ने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ले रही है ताकि जल्द से जल्द लॉकडाउन में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।


लॉकडाउन के कारण भारत में डिजिटल खपत अपने उच्च स्तर पर है, जिसमें लोग प्रति सप्ताह दो घंटे अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। खपत में वृद्धि उपभोक्ता के सर्च बिहेवियर में परिवर्तन को उजागर कर रही है, जैसे कि कारों पर शोध करने में लगने वाले समय में वृद्धि। कोविड-19 महामारी ने मोटर वाहन उद्योग में रुझानों को तेज कर दिया है, लोग ऑनलाइन अधिक समय बिताना पसंद कर रहे हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए अब ज्यादातर टचपॉइंट डिजिटल हो गए हैं।


उपभोक्ताओं के बिहेवियर में यह बदलाव इस बात का संकेत देता है कि ऐसे वाहन निर्माता जो कार खरीदने के अनुभव को और अधिक डिजिटाइज़ करते हैं, वे महामारी के बाद की अधिक सफलता हो सकते हैं। उम्मीदें बदल रही हैं, और अब पहले से कहीं अधिक लोग अपने घर पर ही ब्रांड के साथ खरीदरी और इंगेज रहने की सुविधा चाहते हैं। ऑटो ब्रांडों को अपने रिकवरी रोडमैप पर सही रणनीति लागू करने में मदद करने के लिए इन तीन बातों पर जरूर विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में आगे बढ़ा जा सके....

बाजार में अस्थिरता के बावजूद ग्राहक का इरादा स्थिर है

महामारी के परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं में खुद का वाहन खरीदने की इच्छा बढ़ रही हैं। इससे उन्हें पर्सनल स्पेस और कंफर्ट मिलता जैसा की उन्हें खुद के वाहन और घर पर मिलता है। भारत में ऑनलाइन वाहन खरीदने की आंकड़ा 30-35% की गिरावट के बाद प्री-लॉकडाउन स्तरों पर वापस आ गया है। इंडिया ऑटो पल्स रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कुछ बाजारों में मंदी के बावजूद 45% से अधिक उपभोक्ताओं नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं।

ग्राहक चाहते हैं कि डीलरशिप खुद उनके पास आए

पिछले कुछ वर्षों में ऑफ़लाइन प्रयासों के माध्यम से खरीदारी करने के निर्णयों में कमी देखी गई है। 2016 से 2019 तक पिछले तीन वर्षों में भारत में डीलरशिप की औसत संख्या में 50% की गिरावट आई है।भारत में जगह-जगह लॉकडाउन, सख्त प्रतिबंधों और संक्रमण के खतरे के कारण कुछ उपभोक्ता डीलरशिप पर जाने पसंद भी नहीं कर रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप डीलरशिप पर वॉक-इन और भी कम हो गई है और नुकसान की भरपाई ने निर्माताओं को अपना डीलरशिप, ग्राहकों तक ऑनलाइन ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया है।भारत में रहने वाले हर पांच में से चार लोग जो कार खरीदने पर विचार कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि अगर उपलब्ध हो तो वे ऑनलाइन खरीदारी विकल्प का उपयोग करना चाहते हैं। इसके अलावा, सभी संभावित खरीदारों में से लगभग एक तिहाई जल्द ही एक कार खरीद लेंगे यदि उनके पास एक ऑनलाइन विकल्प होगा ताकि उन्हें डीलरशिप पर न जाने पड़ा।मारुति सुजुकी के सेल्स एंड मार्केटिंग के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर शशांक श्रीवास्तव का कहना है कि वेब बेस्ड सेल्स इन्क्वायरी पिछले तीन वर्षों में 3% से 39% तक बढ़ गई है, स्टडी में सामने आया है कि खरीदार चाहते है कि ऑटो डीलरों उनके लिए खरीदारी करना आसान बनाए ताकि वे घर पर बैठे-बैठे कार खरीद सके। शशांक कहते हैं, शोरूम में वॉक-इन काफी कम हो गई हैं, ऐसे में हम ऑटो डीलर्स के साथ मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

ग्राहक कार खरीदने का एक सहज और व्यक्तिगत अनुभव चाहते हैं

90% से अधिक कार खरीदार, कार निर्माता और ब्रांड वेबसाइट, यूट्यूब, प्रोफेशनल और कंज्यूमर रिव्यू की जानकारी लेने के लिए ऑनलाइन सर्च की ओर रुख करते हैं। वास्तव में, 56% कार खरीदारों का कहना है कि वे अपनी रिसर्च जर्नी के दौरान डीलर की वेबसाइट पर जाते हैं, जो 2017 के आंकड़ों से 40% ज्यादा है, जबकि 60% कार खरीदार अपने स्थानीय डीलरशिप को खोजने के लिए ऑनलाइन रिसर्च करते हैं, जो 2016 की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है।हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड के सेल्स और मार्केटिंग डायरेक्टर तरुण गर्ग का कहना है कि पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन कार रिसर्च धीरे-धीरे बढ़ा है। सोशल डिस्टेंसिंग की आवश्यकताएं कार खरीदारों के लिए ऑनलाइन डिस्कवरी को और भी आकर्षक बनाती हैं। इसलिए, ऑटो डीलरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म में निवेश करना चाहिए और डिजिटल उपभोक्ताओं को सुरक्षित करने के लिए अपनी बिक्री टीमों को आगे बढ़ाना चाहिए।फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा, ऑटो डीलरशिप के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और अपस्किल सेल्स एग्जिक्युटिव्स में निवेश करना आज के डिजिटल उपभोक्ता पर जीत हासिल करने के लिए अनिवार्य है।शुरुआत के लिए, अपने डीलरशिप पर एक डिजिटल डेस्क लगाएं। ऑनलाइन बुकिंग से ऊपर सोचें और मददगार और सहायक बनकर अपने ग्राहकों के लिए डिजिटल और डीलरशिप अनुभव को निजीकृत करने पर विचार करें। उन ग्राहकों के लिए वर्चुअल कंसल्टेशन, ऑनलाइन लोन प्रोसेसिंग, ऑनलाइन इंश्योरेंस या ऑनलाइन ऑफ्टर-मार्केट सेवाओं के विकल्प शामिल करें, जो घर पर रहना अधिक सहज महसूस करते हैं। आप विश्वसनीय थर्ड-पार्ट रिव्यूज के लिंक भी प्रदान कर सकते हैं और ग्राहकों की चिंताओं और सवालों को ईमेल के माध्यम से साझा कर सकते हैं।इसके अलावा, उन लोगों के लिए विकल्पों पर विचार करें जो फिजिल डीलरशिप पर नहीं जाना चाहते हैं। भारत में 24% ग्राहक घर पर ही टेस्ट ड्राइव लेना पसंद करते हैं, और दूसरे सबसे पसंदीदा विकल्प के रूप में डिजिटल शोरूम को स्थान दिया गया है। अन्य विकल्पों में वीआर (वर्चुअल रियलिटी) टेस्ट ड्राइव, रिव्यू वीडियो, ऑनलाइन कॉन्फ़िगरेशन और वीडियो कॉन्फ्रेंस शामिल हैं।आज के ऑटो डीलरों को ग्राहकों के साथ एक सफल ऑनलाइन संबंध बनाने के लिए उन्हें अलग-अलग स्वरूपों में आसानी से समझ में आने वाली जानकारी प्रदान करनी चाहिए। कार ब्रांड जो ग्राहकों की अपेक्षाओं को समझते हैं और उन्हें पूरा करते हैं, उनके तेजी से सफल होने की अधिक संभावना है।

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