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अब 1 जुलाई को मंत्रिमंडल विस्तार नहीं; नए चेहरों में भोपाल से रामेश्वर, विष्णु खत्री, इंदौर से ऊषा, मालिनी और रमेश के नाम चर्चा में

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल का विस्तार अब 1 जुलाई को विस्तार नहीं होगा।मामला शिवराज की पसंद के मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से अटक गया है। केंद्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसमें भोपाल से रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री का नामरेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वहीं इंदौर से ऊषा ठाकुर, रमेश मेन्दोला और मालिनी गौड़ के नाम बताए जा रहे हैं। इधर, खबर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को बुधवार को भोपाल आने का कार्यक्रम निरस्त हो गया है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा अभी भी दिल्ली में ही हैं।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व को शिवराज के पिछले मंत्रिमंडल में शामिल रहे भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ला, रामपाल सिंह, पारस जैन, विजय शाह, गौरीशंकर बिसेन और करण सिंह वर्मा के नाम पर आपत्ति है। मुख्यमंत्री से इनकी जगह नए चेहरों को मौका देने के निर्देश दिए हैं। सोमवार सुबह दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को एक बार फिर से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन मंत्री सुहास भगत से चर्चा की है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी वरिष्ठ नेताओं से कई बार चर्चा हुई है।

बताया जा रहा है कि नए चेहरों में भोपाल और इंदौर से दो-दो विधायकों को मौका मिल सकता है। इनमें भोपाल से रामेश्वर शर्मा और विष्णु खत्री का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वहीं, इंदौर से रमेश मेन्दोला, ऊषा ठाकुर और मालिनी गौड़ के नाम बताए जा रहे हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग से सिंधिया समर्थकों का मंत्री बनना तय है।

प्रभारी राज्यपाल बुधवार को भोपाल आएंगी

राज्यपाल लालजी टंडन के अस्वस्थ होने के कारण उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को मध्य प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है। बुधवार को को उनके दोपहर में भोपाल आकर शपथ लेने का कार्यक्रम है।राजभवन में तैयारियां भी पूरी कर ली गईं।

ऊषा ठाकुरमालिनी गौड़रमेश मेन्दोला

मार्च में सियासी उलटफेर, भाजपा की सरकार के 100 दिन पूरे
राज्य में मार्च महीने में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में आए। उनके समर्थन में 22 विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 23 मार्च को शिवराज ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अप्रैल में 5 मंत्रियों को शपथ दिलाकर मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल का गठन किया। इन 5 में से 2 मंत्री सिंधिया खेमे से हैं।

29 मंत्री और बनाए जा सकते हैं
विधानसभा में सदस्यों की संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। इनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस तरह मुख्यमंत्री अधिकतम 29 और मंत्री बना सकते हैं।



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